JPSC-JSCC चयन विवाद को लेकर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने सरकार पर साधा निशाना, छात्र आंदोलन को बताया ‘जेनुइन युवाओं’ की आवाज; कांग्रेस, JMM और RJD नेताओं के रिश्तेदारों के चयन को लेकर जांच की मांग
रांची: झारखंड में JPSC और JSCC चयन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और छात्र आंदोलन के बीच गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने राज्य सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। रांची से दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में दुबे ने कहा कि यदि नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
निशिकांत दुबे ने JPSC-JSCC को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को ‘जेनुइन युवाओं’ का आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि इसे दिल्ली के ‘जेन जी’ आंदोलन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सांसद ने आरोप लगाया कि दिल्ली से कुछ लोग और संगठन झारखंड आकर छात्र राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका उद्देश्य छात्रों के हित से जुड़ा हुआ नहीं है।
13 अगस्त तक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन में शामिल होने की चेतावनी
निशिकांत दुबे ने कहा कि फिलहाल संसद का सत्र चल रहा है, इसलिए पार्टी के कुछ नेता तत्काल छात्र आंदोलन में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त के बाद पार्टी की अनुमति मिलने पर महत्वपूर्ण नेता छात्रों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होंगे।
सांसद ने यह भी चेतावनी दी कि यदि 13 अगस्त तक JPSC-JSCC विवाद का समाधान नहीं निकला तो वह खुद रांची में छात्रों के समर्थन में अनशन शुरू करेंगे। उनके मुताबिक, इसके बाद सरकार और युवाओं के बीच इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
JMM के ‘ING’ आंदोलन पर भी निशाना
JPSC अभ्यर्थियों के समर्थन में JMM की ओर से चलाए जा रहे ‘ING’ आंदोलन पर निशाना साधते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि उनके आंदोलन और उनके बताए ‘JNG’ में काफी अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल छात्रों के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
दुबे ने कहा कि उनका फोकस ‘जेनुइन युवा’ हैं और छात्रों के मुद्दे का समाधान होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलन को लेकर अब तक हुई बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है और अब पूरा मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में है।
हेमंत सोरेन सरकार पर जांच नहीं कराने का आरोप
निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार JPSC-JSCC विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और आंदोलन को समाप्त कराने की दिशा में गंभीर पहल नहीं कर रही है।
सांसद ने आरोप लगाया कि यदि नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होती है तो कांग्रेस, JMM और RJD से जुड़े नेताओं के रिश्तेदारों के चयन तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि “अगर निष्पक्ष जांच हो तो कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी के नेताओं के रिश्तेदारों के यूपीएससी-जेपीएससी पास करने का सच सामने आ जाएगा।”
हालांकि, ये आरोप निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए हैं और इनके समर्थन में स्वतंत्र रूप से कोई जांच निष्कर्ष सामने आने की बात इस बयान में नहीं कही गई है।
छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप
सांसद ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि युवाओं से जुड़े इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि JPSC और JSCC अभ्यर्थियों की मांगों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
फिलहाल JPSC-JSCC विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है और 13 अगस्त की समयसीमा को लेकर निशिकांत दुबे के बयान ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। अब निगाहें राज्य सरकार की अगली पहल और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
JPSC-JSCC Controversy: 13 अगस्त तक समाधान नहीं तो अनशन करेंगे निशिकांत दुबे, बोले- निष्पक्ष जांच से सामने आएगा चयन का सच



